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जिस दफ्तर में मां लगाती थी झाड़ू, उसी दफ्तर में बड़ा अक्सर बन कर किया माँ का सपना पूरा

कहते है मेहनत अगर पूरे लगन से की जाए तो सफलता पाने से कोई भी नहीं रोक सकता यह कहावत सही बैठती है अरवल जिले के मनोज कुमार के ऊपर। आज हम बताने जा रहे है आपको मां और बेटे के मेहनत को ऐसी दास्तान जिसको जान कर आप भी मान जायेंगे को मेहनत करने वालो की कभी हार नही होती। यह कहानी है एक ऐसे महिला की जो जिस दफ्तर में 25 सालो तक झाड़ू लगाती रही, उसी दफ्तर में उसका बेटा एक बड़ा अफसर बन कर आ गया। अरवल जिले की रहने वाली सावित्री देवी का जीवन बहुत दुखदाई रहा। किसानी परिवार से ताल्लुक रखने वाली सावित्री देवी ने 1990 में हुए चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों की वेकेंसी में आवेदन दिया और उसमे उनका चुनाव हो गया। कृषि परिवार से ताल्लुक रखने वाली महिला के लिए यह बहुत बड़ी बात थी, लेकिन यह तो बस शुरुआत थी सफलता की, आगे चल कर उनके बेटे ने जो कमाल किया उसे सुन का हर मां को अपने लाल पर गर्व होगा।

बेटे ने पाई उसी दफ्तर में बड़े अफसर की नौकरी, मां जहा झाड़ू लगाती थी

जिस दफ्तर में मां लगाती थी झाड़ू, उसी दफ्तर में बड़ा अक्सर बन कर किया माँ का सपना पूरा

अरवल जिले की रहने वाली सावित्री देवी ने 1990 में बिहार सचिवालय में नौकरी करनी शुरू कर दी। 8वी परीक्षा उत्तीर्ण सावित्री देवी के लिए शुरुआती कुछ साल काफी असमंजस वाली स्थिति रही। सावित्री देवी को जब उनकी नौकरी मिली थी उस समय उनका बेटा दसवीं की तैयारी कर रहा था। सावित्री देवी को पटना में उनकी पहली पोस्टिंग मिली। बिहार सचिवालय में करीब 3 सालो तक कार्य करने के बाद 2003 में उनकी पोस्टिंग जहानाबाद में हो गई। 3 साल जहानाबाद में कार्यरत होने के बाद सावित्री देवी को 2006 में फिर से बिहार सचिवालय में बुला लिया गया। 2009 में सावित्री देवी सेवानिवृत हुई लेकिन तब तक उनका बेटा यह मन में ठान चुका था कि वह अपने मां के सपने को साकार करेगा। 2009 में सावित्री देवी का बेटा मनोज कुमार अनुमंडल पदाधिकारी विभाग में ऑफिसर के पद पर कार्यरत हुए। मनोज कुमार की पहली पोस्टिंग जहानाबाद में हुई जहां उनकी मां उनसे पहले कार्यरत थी। अपने पहले पोस्टिंग के बाद मनोज कुमार ने जो बात बताई वह आप को भावुक कर देगी।

मां के प्रेरणा से मिला उत्साह, सच कर दिखाया मां के सपने को

जिस दफ्तर में मां लगाती थी झाड़ू, उसी दफ्तर में बड़ा अक्सर बन कर किया माँ का सपना पूरा

अनुमंडल पदाधिकारी विभाग के ऑफिसर बनने के बाद जब मनोज कुमार की पहली पोस्टिंग जहानाबाद में हुई तब वह बेहद भावुक हो गए। उनका कहना था कि इसी ऑफिस में उनकी मां काफी सालों तक कार्यरत थी। मां के बार बार ट्रांसफर होने की वजह से वह उनसे ज्यादा मिल नहीं पाते थे लेकिन मां उन्हें हमेशा प्रेरणा देती थी और ढाढस बढ़ाती थी कि तुम तैयारियों में जुटे रहो और सपने को साकार करो। मनोज कुमार आज जिस ऑफिस में एसडीओ के पद पर कार्यरत है उसी ऑफिस में कभी उनकी मां सावित्री देवी झाड़ू लगाने का काम करती थी। आज मनोज कुमार की मां सावित्री देवी खुद को बहुत गौरवान्वित महसूस करती है। मनोज कुमार ने बताया कि वह मां के सपने पूरे करने के लिए दिन रात मेहनत करते थे ताकि मां को गर्व महसूस करवा सके और आज उन्होंने यह कर दिखाया।

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