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चमत्कार: डॉक्टरों ने किया मृत घोषित, घर आते ही चालू हो गई बच्चे की धड़कन

बहादुरगढ़ । अक्सर अस्पतालों में लापरवाही के केस सामने आते रहते हैं, लेकिन दिल्ली का एक बड़ा अस्पताल इस मामले में दो कदम आगे निकला. बता दें कि इस अस्पताल के स्टाफ द्वारा मृत घोषित किए गए एक बच्चे की घर पहुंचने पर धड़कन चालू मिली. दवाओ और दुआओं के बदौलत आज बच्चा स्वस्थ है. अस्पताल स्टाफ की लापरवाही पर परिजनों ने नाराजगी जताई.

दिल्ली में डॉक्टरों ने दिखाई बड़ी लापरवाही 

यह मामला बहादुरगढ़ शहर से जुड़ा हुआ है. किला मोहल्ला के निवासी विजय कुमार शर्मा के पोते करीब 6 वर्षीय कुणाल शर्मा को टाइफाइड हो गया था. ज्यादा तबीयत खराब होने की वजह से 25 मई को कुणाल को दिल्ली स्थित कलावती अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. जहां चिकित्सकों ने उपचार शुरू किया और कहा कि बच्चे की हालत गंभीर है बचने के चांस बहुत कम है. विजय कुमार के अनुसार 26 मई को वह अपने पोते से मिलने गए. हम मिलकर वापस आ रहे थे तभी बेटे हितेश का फोन आया. हितेश ने कहा कि कुणाल के पास बस आधे घंटे का समय है. फिर हमने उसे समझा कर शांत कराया. आधे घंटे बाद फिर हितेश का फोन आया और उसने कहा कि कुणाल नहीं रहा. डॉक्टरों ने उसे डेड घोषित कर दिया. इतना सुनकर परिवार में चीख-पुकार शुरू हो गई. अस्पताल के  स्टाफ ने अपनी तरफ से कुणाल को मरा हुआ समझकर हितेश को थमा दिया.

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डॉक्टरों ने किया मृत घोषित चल रही थी मरीज की सांसे

फिर जब अंतिम संस्कार की बात हुई तो दादी ने कहा कि इसे बहादुरगढ़ ले आओ यहां सभी तैयारियां कर ली है. बर्फ की सीली समेत सभी समान मंगवा लिया गया अगले दिन अंतिम संस्कार करना था. जैसे ही कुणाल को एंबुलेंस लेकर आई तो सभी के आंसू निकल पड़े. जब अनु ने कुणाल को हाथों से उठाया तो उसे कुछ महसूस हुआ, उस समय कुणाल की धड़कन चालू थी. इसके बाद ही हितेश व उसके भाई ने कुणााल को मुंह सेे  सांस देना शुरू किया. जैसे ही पिता ही ने सास देनी चाही तो बेटे कुणाल ने उसके होटो को काट लिया . इसके बाद उसकी छाती को पंप किया गया, जिसे उसके हाथ पैर हिलने लगे. यह देखकर मौके पर मौजूद हर कोई हैरान रह गया.

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इसको किसी ने चमत्कार तो किसी ने इत्तेफाक कहा. कुणाल के परिजन दोबारा एंबुलेंस में डालकर दिल्ली ले आए. संजीवनी अस्पताल में ले जाया गया. जहां डॉक्टरों ने कहा कि देर हो गई है चांस बहुत कम है इसे दिल्ली के अग्रसेन या बालाजी एक्शन अस्पताल में ले जाओ. लेकिन उस दौरान दोनों अस्पतालों में बेड खाली नहीं थे फिर रोहतक के  तेज अस्पताल में ले गए. जहां डॉक्टरों ने उसके 15% बचने के चांस बताएं. उन्होंने कहा कि 0 से 15% पर आए हैं तो आगे सब सही होगा. दुआएं रंग लाई और कई दिन इलाज चलने के बाद पिछले सोमवार को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.

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