Breaking News

भिवानी में महिला की मौत के बाद अस्पताल ने कहां शरीर पर सूजन है नहीं मिलेंगे आभूषण, दबाव में लौटाए

भिवानी । जहां एक और इस भयंकर आपदा के समय लोग एक दूसरे का बढ़-चढ़कर सहयोग कर रहे हैं. ऐसी खबरें भी आई की लोगों ने आपदा में फंसे लोगों की मदद के लिए अपने मकान वाहन तक बेच डाले. किसी ने ऑक्सीजन सिलेंडर की मुफ्त सप्लाई की. किसी ने मरीजों के घरों तक मुफ्त खाना पहुंचाने का काम भी किया. कई अस्पताल संचालकों ने भी मरीजों की भरपूर सहायता की. सरकारों ने अस्पतालों को इस नेक काम के लिए यथासंभव मदद का आश्वासन दिया.

आज जो भिवानी से खबर आई है वह मानवता को तार-तार करती हुई नजर आती है. प्राप्त जानकारी के अनुसार भिवानी शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में पिछले कई दिनों से एक महिला कोरोना संक्रमित होने के कारण भर्ती थी. रविवार सुबह डॉक्टरों द्वारा उस महिला की मौत की खबर परिजनों को दी गई. परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा हो. अस्पताल के कर्मचारियों ने मृतक महिला की सोने की चेन और कानों की बालियां उन्हें दे दी. लेकिन मृतक महिला के घरवालों ने बताया कि उसके हाथों में चार सोने की चूड़ियां, तीन अंगूठियां और हीरा जड़ित नथ लगा हुआ था. परिजनों ने जब इन सब की मांग अस्पताल स्टाफ से की तो उन्होंने जो जवाब दिया वह सुनकर शायद आपको भी गुस्सा आए.

यह भी पढ़े   हरियाणा में दलित महिला को 9 दिन तक बनाया बंधक, फिर किया गैंगरेप, दरिंदगी में पुलिस वाला भी शामिल

स्वतंत्रता सेनानी की पुत्रवधु थीं महिला

गौरतलब है कि जो महिला अस्पताल में पिछले 19 दिनों से दाखिल थी वह भिवानी के सबसे पहले विधायक स्वर्गीय पंडित राम कुमार की पुत्रवधू थी. पंडित राम कुमार स्वतंत्रता सेनानी भी रह चुके हैं. उनके पुत्र स्वर्गीय अक्षय कुमार की पत्नी आशा लता का कोरोना संक्रमण के चलते एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था. जिसकी बाद में रविवार को मृत्यु हो गई. अस्पताल प्रशासन ने परिजनों को कहा कि मृतिका के शरीर पर सूजन आ चुकी है जिसके कारण उसके जेवरात निकाले नहीं जा सकते इसीलिए इन जेवरात के साथ ही महिला के शरीर को पैक कर दिया गया. जब इस मामले की जानकारी ड्यूटी कर रहे डॉक्टर को दी गई तो उन्होंने इस मामले में कोई हस्तक्षेप करने से मना कर दिया.

हंगामा करने पर लौट आए चार लाख के आभूषण

अस्पताल जब इस मामले को दबाने की कोशिश में था तभी मृतिका के एक करीबी अधिवक्ता रिश्तेदार को बुलाया गया. जिसने अस्पताल स्टाफ से इस बारे में पूछताछ करने की कोशिश की तो वहां मौजूद स्टाफ सदस्यों ने उसे दुर्व्यवहार भी किया. इसके बाद अस्पताल में जमकर हंगामा हुआ. बाद में एक बाहरी डॉक्टर ने हस्तक्षेप किया जिसके बाद मजबूरी वश अस्पताल स्टाफ ने परिजनों को बाकी के जेवरात लाकर सौंप दिए जिनकी कीमत तकरीबन 4 लाख रुपए से भी अधिक बताई जा रही है.

यह भी पढ़े   करनाल में बड़े भाई ने की छोटे भाई की हत्या, ज़मीन के लिए हुआ था विवाद

बेशर्मी की हद तो तब हुई जब अस्पताल प्रशासन ने महिला के मृत शरीर को श्मशान घाट ले जाने के लिए एंबुलेंस तक मुहैया नहीं करवाई जबकि सरकार के नियम अनुसार अस्पताल द्वारा मृतकों को श्मशान घाट ले जाने के लिए अस्पताल द्वारा एंबुलेंस उपलब्ध करवाई जाती है. उल्लेखनीय है कि हस्पताल स्टाफ के अनुसार मृतका के शरीर पर सूजन है और जेवरात निकाले नहीं जा सकते, जबकि बाद में जब अस्पताल पर दबाव बढ़ा तो उन्होंने उन आभूषणों को लौटा दिया और मृतका के जेवरात कहीं से भी कटे हुए नहीं थे.

अस्पताल का लाइसेंस किया जाए रद्द

जैसे ही इस खबर की सूचना सभ्य समाज हरियाणा तक पहुंची तो रोष स्वरूप सभ्य समाज हरियाणा के प्रधान ने अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने की मांग की. उन्होंने कहा कि अब तक इस अस्पताल में जितनी भी कोरोना संक्रमण के चलते मौतें हुई हैं,उन सब की जांच की जाए और अभी वह इस बारे में मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से शिकायत भी करेंगे.

About Rohit Kumar