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लॉकडाउन में बसों को सवारिया ना मिलने से रोडवेज को रोज़ लाखों का नुकसान

नारनौल : प्रदेश में लॉकडाउन का यह चौथा चरण चल रहा है. लगातार 3 मई से लॉक डाउन की पाबंदियां लागू है. जिसके चलते बसों में सवारी करने वाले लोगों की संख्या बहुत ज्यादा कम हो चुकी है. अब नारनौल डिपो से मात्र 10 बसें ही चल रही हैं. यह सारी बसें रेवाड़ी, गुरुग्राम, दादरी, महेंद्रगढ़ कनीना और नांगल चौधरी आदि रूट पर चल रही है ऐसे में सिर्फ चंद कर्मचारियों को ही ड्यूटी के लिए बुलाया जा रहा है. इसके अलावा दिल्ली और राजस्थान जैसे रूटों पर बसें नहीं चलाई जा रही हैं.

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दरअसल कोरोना संक्रमण के डर के चलते लोग बसों में सफर करने से परहेज कर रहे हैं. हालांकि यात्रियों के संख्या के हिसाब से ही अलग-अलग रूटों पर बसें चलाई जा रही हैं, लेकिन बसों को ज्यादा सवारी नहीं मिल पा रही हैं. इस समय में केवल वही लोग बसों में यात्रा कर रहे हैं, जिनको बहुत ज्यादा मजबूरी है. कोरोना महामारी से पहले डिपो की 135 से अधिक बसें चलती थी, जिन से प्रतिदिन 14 लाख की आमदनी होती. अब यह आमदनी घट कर महज 40 हज़ार रूपए प्रतिदिन हो गई है. एक अनुमान के मुताबिक डिपो को इस लॉकडाउन के चलते इन 21 दिनों में 285 लाखों रुपए का नुकसान अब तक हो चुका है.

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43 चालकों की ड्यूटी एंबुलेंस में लगाई

बता दें कि कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए रोडवेज की 5 मिनी बसों को एंबुलेंस में तब्दील कर दिया था. अब इनको चलाने के लिए 30 रोडवेज के चालकों की ड्यूटी लगाई गई है. इसके अलावा 13 रोडवेज चालक, नागरिक अस्पताल की एंबुलेंस चलाने की ड्यूटी दे रहे हैं. इस प्रकार कुल 43 चालक एंबुलेंस चला रहे हैं.

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