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200 रुपए पहुंचे सरसों के तेल के दाम, जनता का हाल हुआ बेहाल

पलवल । एक ओर कोरोना का खतरा, दूसरी गर्मी और ऊपर से बढ़ती हुई महंगाई ने जिले के लोगों की समस्या को बढ़ा दिया है. पहले अचानक डीजल के दामों में वृद्धि हुई. अब सरसों के तेल के दाम भी बढ़ते जा रहे हैं. ऐसा पहली बार हुआ है कि सरसों का तेल ₹90 से बढ़कर ₹200 के पार हो गया है. इसकी बड़ी वजह जमाखोरी और सरसों के दाम बढ़ने को माना जा रहा है. बता दें कि सरसों के तेल के साथ-साथ मूंगफली व सूरजमुखी जैसे अन्य तेलों के दाम भी खूब बढ़ने लगे हैं.

लगातार बढ़ रहे सरसों के तेल के दाम लोगों की परेशानियां बढ़ा रहे है 

कोरोना महामारी के भयानक दौर में पहले ही आम लोगों की मुसीबतें कम नहीं हो रही. वहीं दूसरी और पेट्रोल डीजल की कीमतों के साथ-साथ अब खाने के तेल की कीमतें भी आसमान छूने लगी है. इन दिनों सोशल मीडिया पर सरकार का मजाक उड़ाया जा रहा है और लोग कह रहे है कि महंगे पेट्रोल डीजल पर लड़ते रहे और बाजी सरसों का तेल मार गया. शहर के एक प्रतिष्ठित कारोबारी ने बताया कि मंडियों में 6500 से लेकर 7000रूपये क्विंटल के हिसाब से सरसों की फसल बिक रही है. साथ ही इस पर 6% जीएसटी और 1% मंडी शुल्क अलग से लगता है. 1 क्विंटल सरसों की फसल का तेल निकाला जाए तो 33 किलो तेल निकलता है. जिसमें से 2 किलो खल जल जाती है. ऐसे में 65 किलो खल बचती है.थोक रेट में ₹170 किलो तेल बिक रहा है.

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हिसाब से 33 किलो तेल की कीमत 5610 रुपए बनती है. वहीं 65 किलो खल ₹30 प्रति के हिसाब से 1950 की बिक रही है. वही पिराई ढाई ₹100 क्विंटल है. लोडिंग अनलोडिंग में ₹5 किलो का चार्ज लग जाता है. वही ट्रांसपोर्ट का खर्चा अलग से है. यही वजह है कि बाजार में सरसों का तेल महंगा बिक रहा है. कोरोना से पहले यही फसल 3000 से 3500 रुपए प्रति क्विंटल बिक रही थी. फुटकर मे तो अब सरसों का तेल 190 से ₹200 किलो तक बिक रहा है. तेल की दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ रहे हैं. जिले में आमतौर पर छह खाद्य तेल का उपयोग किया जाता है.

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