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गुरनाम चढूनी का ऐलान: 23 मई तक किसानों के मुकदमें नहीं हुए रद्द तो 24 को करेंगे घेराव

हिसार । बीते 5 महीनों से किसान आंदोलन चल रहा है. सरकार और किसान दोनों अपने-अपने पक्ष को लेकर अडिग हैं. सरकार चाहती है कि किसान अपने प्रदर्शन को खत्म कर दें. लेकिन किसान लगातार इस मांग पर अड़े हुए हैं कि सरकार द्वारा लागू कृषि कानूनों को वापस ले लिया जाए. इसी को लेकर पुलिस और किसानों में लगातार झड़प की घटनाएं सामने आती रहती हैं. ऐसा ही नजारा सोमवार को देखने को मिला जब मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर के हिसार आगमन का विरोध करने किसान एकत्रित हुए.

File Photo.

भीड़ को तितर-बितर करने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था. स्थिति बिगड़ते देख पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े. जिससे कई किसानों को चोटें भी आई हैं. किसानों पर हुए इस हमले को लेकर अब किसान संगठन लामबंद हो गए हैं. पुलिस ने भी किसानों पर मुकद्दमे दर्ज किए, जिनके विरोध में रामायण टोल प्लाजा पर किसानों ने पंचायत की. किसानों ने ऐलान किया कि सोमवार को कमिश्नर का घेराव किया जाएगा और सरकार फिर भी नहीं मानी तो फिर सांसदों और विधायकों का भी घेराव किया जाएगा. किसानों ने कहा कि लॉकडाउन के दौर में मुख्यमंत्री हिसार स्थित कोविड हस्पताल का फीता काटने आए थे. उनके साथ उनका लाव-लश्कर भी था. आपस में शारीरिक दूरी भी नहीं बनाई हुई थी. मुख्यमंत्री ने कोरोना प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है. इसलिए उन पर भी मुकदमा दर्ज किया जाए.

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शनिवार को होंगे फिर इकट्ठा

किसानों ने ऐलान किया कि चौधरीवास टोल पर अगले शनिवार को सभी टोल प्लाजा से किसान इकट्ठे होंगे और मीटिंग का आयोजन किया जाएगा. गौरतलब है कि 24 घंटे के अंदर रामायण टोल प्लाजा पर किसानों द्वारा दूसरी बार पंचायत का आयोजन किया गया. जिसमें किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी के अलावा विधायक सोमवीर सांगवान भी शामिल रहे. किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने ऐलान किया कि यदि प्रशासन द्वारा किसानों पर दर्ज मुकदमे 23 मई तक वापस नहीं लिए गए तो 24 तारीख को हिसार में कमिश्नर का घेराव किया जाएगा. यदि सरकार फिर भी नहीं मानी तो 26 मई को सभी सांसदों और विधायकों का घेराव किया जाएगा.

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मुख्यमंत्री पर एफआईआर दर्ज करवाने की पहले भी हो चुकी है मांग

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री के हिसार दौरे की आलोचना लगातार होती आ रही है. बीते दिनों भी रोहतक के एक अधिवक्ता ने मुख्यमंत्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की थी. उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री के इस दौरे के दौरान कोरोना प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ था, जो कि कानून का उल्लंघन है इसीलिए उन पर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए.

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